
📰 अमरोहा का ‘देशद्रोही पुल’? – स्पेस टेक्नोलॉजी से बना वर्ल्ड क्लास ब्रिज ट्रैक्टर के आगे धंसा, सवालों के घेरे में सिस्टम
अमरोहा | वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में बना एक ‘वर्ल्ड क्लास’ ब्रिज इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा था कि यह पुल स्पेस टेक्नोलॉजी से बना है, निर्माण में क्वालिटी का खास ध्यान रखा गया है और यह भविष्य के ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। लेकिन 3 साल भी नहीं बीते, और एक ट्रैक्टर की सवारी में पुल बैठ गया — मानो किसी साजिश का शिकार हो गया हो।
सरकार ने जिस पुल को विकास की मिसाल बताया था, अब वही पुल खुद ही सरकार की साख पर सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया पर तंज कसे जा रहे हैं कि “पुल देशद्रोही निकला”, “सरकार को बदनाम करने के लिए ट्रैक्टर के साथ मिलकर साजिश रची”, और “अब पुल को सजा मिलनी चाहिए।”
हालांकि मजाक के अंदाज़ में कही जा रही ये बातें, बड़े सवालों की ओर इशारा करती हैं —
अगर स्पेस टेक्नोलॉजी से बना पुल तीन साल में ट्रैक्टर का भार नहीं झेल सका, तो इसकी क्वालिटी का जिम्मेदार कौन है?
क्या ये भ्रष्टाचार, लापरवाही या जमीनी स्तर की अनदेखी का मामला है?
पुल का निर्माण किस एजेंसी ने किया, किन अधिकारियों ने निरीक्षण किया और किस स्तर की निगरानी हुई?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुल का निर्माण चाहे जितनी तकनीक से हुआ हो, लेकिन नींव और सामग्री में भारी अनियमितता की पहले से ही शिकायतें थीं जिन्हें नज़रअंदाज़ किया गया।
अब प्रशासन जांच की बात कर रहा है और संबंधित इंजीनियरिंग एजेंसी को नोटिस देने की तैयारी की जा रही है। वहीं सरकारी तंत्र इस घटना को प्राकृतिक कारणों और मिट्टी के खिसकने से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
परंतु जनता के मन में अब सवाल सीधा है — अगर वर्ल्ड क्लास तकनीक से बने पुल का ये हाल है, तो आम पुलों की क्या गारंटी है?
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
उत्तर प्रदेश महासचिव – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद
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